Wednesday, February 15, 2006

एक कानपुरिया की तलाश

आज अतुल अरोरा जी का संस्मरण "लाइफ इन ए एचओवी लेन" पढ़ा. संस्मरण इतना पसंद आया कि आज ही 10 के 10 अध्याय पढ़ डाले. बीच में छोड़ने का मन नहीं हुआ. एक कानपुरिया के अमेरिका तक के सफर की दास्तान वाकई शानदार है.

संस्मरण को पढ़कर एक मित्र रवि अवस्थी की याद आ गई, जिससे अब कोई संपर्क नहीं है. आखिरी बार कब बात हुई थी ये भी याद नहीं. शायद कोई छह-सात साल पहले. अचानक इस मित्र की याद शायद इसलिए आ गई कि वो भी एक कानपुरिया ही है और कभी उसका भी सपना यूएस जाना था.
संभव है आज उसका सपना पूरा हो गया हो और उसे दिल्ली के अपने पुराने संपर्कों की याद तक न हो. पर न जाने क्यों फिर भी आज उसे तलाशने की इच्छा हो रही है. ऐसा नहीं है कि इससे पहले कभी उसकी याद नहीं आई पर यही सोचकर तस्सली कर ली कि संपर्क करने का कोई साधन नहीं है. जिस समय दोस्ती हुई थी उस समय न तो मोबाइल क्रांति भारत में हुई थी और न ही इंटरनेट का इतना प्रचार-प्रसार था कि मेल इत्यादि की जानकारी होती. लगता नहीं कभी उससे संपर्क हो सकेगा.

रवि दिल्ली के लाजपत नगर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करता था और अपने दोस्त पंकज के साथ जनकपुरी में महावीर एन्कलेव में रहता था. पंकज भी रवि के ही ऑफिस में काम करता था. रवि से मेरा परिचय पड़ोस में रहने वाली मेरी एक मित्र के जरिए हुआ था. रवि से उतना अधिक मेरा परिचय नहीं था. बस कुछेक बार फोन पर बात हुई थी और दो या तीन बार संक्षिप्त मुलाकात. एक बार उसने बताया था कि उसे अरहर की दाल और चावल पसंद है.

बस इतनी ही पहचान थी उससे. अब वो कहां है, क्या कर रहा है कुछ पता नहीं. अब कभी उस कानपुरिये से बात होगी लगता नहीं. हो सकता है वो भी इसी तरह पुराने दोस्तों को याद करता हो....

3 Comments:

At 3:28 AM, Blogger Atul Arora said...

आपको मेरी रचना पसँद आई, धन्यवाद। वैसे मेरा पन्ना के लेखक जीतू भाई से पूछिये शायद वे आपके मित्र को जानते हो। काफी दिन कानपुर मे काम किया है उन्होने।

 
At 10:08 AM, Anonymous जीतू said...

हाँ, भईये, जरा ज्यादा जानकारी दो रवि अवस्थी के बारे मे तभी कुछ बता पायेंगे।

एक और बात, मित्र जब भी किसी ब्लॉगर का जिक्र छेड़े, तो उसकी साइट का लिंक अवश्य दिया करें। इससे उस ब्लॉगर की टैक्नोराती मे रेटिंग बढती है और साथ ही साथ आपके ब्लॉग पर आवाजाही बढ जाती है।जिससे आपको और पाठक मिलते है। आशा है आप ध्यान रखेंगे।
रही बात अतुल अरोरा की, तो भैया हम और हमारा परिवार भी उनके लेखन के दीवाने है, उनका लिखा आप यहाँ रोजनामचा में भी देख सकते है।

 
At 2:54 PM, Blogger sur said...

आप लोगों की पहल के लिए धन्यवाद. घर पर पुरानी स्लेम बुक में देखना होगा. अगर कुछ और जानकारी मिली तो बताऊंगी. शायद आप लोगों की मदद से ही रवि का कुछ पता चल जाए. अच्छा लगा आप दोनों का रेस्पांस देखकर.

जीतू जी आपकी बात याद रहेगी, आगे से इसका ध्यान रखूंगी.

 

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