Thursday, January 05, 2006

बुड़बक नहीं बनना इस साल

ई साल हम बुड़बक नहीं बनना चाहता हूं, इसलिए पिछला साल से सबक लूंगा। इस साल के लिए हमने जो सोचा है, कुछ चीज आपको भी बताता हूं।

हम खूब घूस खाऊंगा, लेकिन सांसदों के जैसे नहीं कि कुर्सिये से हाथ धोना पड़े, बल्कि एमसीडी के अफसर की तरह। पहले घूस लेकर अवैध निर्माण कराओ औरो फेर खुदे तोड़ने पहुंच जाओ। बंदा फेर घर बनाएगा, मतलब एक बेर औरो आपको घूस पहुंचाएगा। घूसखोरी में ऐसी मौज दुनिया में कहीं और देखे हैं आप?

कानून अपनी जेब में करना है, इसलिए सत्ताधारी पार्टी का एमपी या फेर केंद्रीय मंत्रियो बन सकता हूं। देखे थे न जयप्रकाश यादव को, बदमाश भाई को थाने से जबर्दस्ती छुड़ा लिया। बिपक्षी सब हो हो नहीं करता, तो अभियो उ मंत्री रहते। कानून के रक्षक बनने का शपथ खाने के बाद एतना तो आप देश को 'खा ही सकते हैं! उ शहाबुद्दीने को देख लीजिए। अगर पाक का नमक भी केकरो घर में मिल जाए, तो उ पाक एजेंट हो जाता है औरो हिरण का नाखूनों मिल जाए, तो मेनका गांधी के चेला सब हल्ला करने लगता है, लेकिन मरल हिरण के साथ वीरता दिखाने वाला फोटुआ खिंचाके और घर में पाकिस्तानी गोली रखके भी मियां जी का कुछो नहीं बिगड़ा। पुलिस पकड़वो किया उनको, तो बिजली चोरी के जूर्म में, जैसे पुलिस न होकर बीएसईएस का करमचारी हो! ऐसे में इस साल भगवान औरो चैनल सब से हम दुआ करूंगा कि सारा बिपक्ष दुर्योधन बनकर चक्रव्यूह में फंस जाए।

अगर आदर्श की बात करें, तो हमरे लिए चुनौती के पी एस गिल बनना है, ताकि सबको जड़ से 'खतम' कर दूं। फिर चाहे उ पंजाब से आतंकवाद खतम करने की बात हो या फिर देश से हॉकी के खेल को। आखिर रोम के जलने के समय नीरो की तरह बंसी हर कोई थोड़े बजा सकता है! कलेवर चाहिए इसके लिए। हां, उमा भारती हम कभी नहीं बनूंगा, क्योंकि बेआबरू होकर अपने ही कूचे से हम नहीं निकलना चाहता हूं। आप चाहे जितना मोटा खंभा हो, अगर घर ही कहे कि उसको आपका सहारा नहीं चाहिए, तो डूब मरने वाली बात होती है। इससे बढ़िया तो इस खुशफहमी में जीना है कि दुनिया इसलिए है, क्योंकि हम हूं।

इस साल के हमरे एजेंडे में शादी भी है, लेकिन बीवी घर लाने से पहले हमको उ मशीन चाहिए, जो जासूसी वाला कैमरा को जाम कर देती है। उ परभात बाबू को देख लीजिए, बेचारा हनीमून के लिए शिमला नहीं गया, क्योंकि वहां चोरी-चोरी ब्लू फिलम बन जाती है। ई जासूसी कैमरा भी बड़का आफत है हो! बीवी लाएंगे, तो एगो घरो चाहिए, लेकिन बैंक नेगेटिव एरिया में लोन नहीं देती और मिडिल क्लास लायक दिल्ली में पॉजिटिव एरिया आपको कहीं दिखा है? माइक्रोस्कोप खरीदूंगा इस साल, ताकि ऐसन एरिया ढूंढ सकूं।

खैर, ई सब बात 'खट्टा अंगूर' वाली है, भगवान करे आपका पूरा साल 'मीठा अंगूर' वाला हो।
वैसे, टीवी पर आने के लिए हम पीआरओ भी बन सकता हूं, लेकिन तभिये, जब हमरे पास अमर सिंह जैसे यूपी कंपनी, मुलायम कंपनी, सपा कंपनी, अंबानी कंपनी, सहारा कंपनी और बच्चन कंपनी जैसे क्लाइंट हो औरो यूपी, दिल्ली से लेकर मुंबई तक का एरिया।

Article: PRJ

5 Comments:

At 9:40 PM, Blogger Raviratlami said...

नए साल में बुड़बक नहीं बनने के लिए शुभकामनाएँ.

पर, आप शादी भी कर रहे हैं, और बुड़बक नहीं बनना चाहते - ऐसा कभी हो सकता है? और, ऐसा कभी हुआ भी है भला? :)

 
At 4:45 PM, Anonymous Anonymous said...

मुझे नहीं पता था कि बुड़बक ही शादी करता है. मार्गदर्शन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद. एक प्लान कैंसिल हुआ.

प्रिय रंजन

 
At 5:14 PM, Blogger Pratik said...

शादी करने में ही ज़्यादा अक़्लमंदी है, भले ही बुड़बक क्‍यों न बनना पड़े। इसलिये हमारा सुझाव है कि कर लो।

 
At 3:44 PM, Anonymous आशीष said...

भैया,

शादी का इरादा कर क्यो हमे अकेला छोड जा रहे हो ? हमे देख लो अनुप शुकुल जी के इतने दबाव के बावजुद हम डटे हुंये है.
चिर क्वारें अटल जी कह गये है "ये अच्छी बात नही है."

आशीष

 
At 10:59 AM, Blogger SHASHI SINGH said...

मेरी तो सलाह है कि आशीष के कुशल नेतृत्व में एक विश्व कुंवारा मंच का गठन हो जाए. यह बात अलग है कि यह भावी मंच मैं आप कुंवारों से साझा नहीं कर पाऊंगा.

 

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