Friday, May 12, 2006

गलतफहमी का झटका

भले ही इस सड़ल गरमी में हमरे घर में बिजली नहीं रहती, लेकिन करंट का झटका तो हमको रोज लगता रहता है। वैसे, आप इसको गलतफहमी का झटका कह सकते हैं।

हाल में सबसे बड़का झटका हमको ताऊ के अरबपति होने की खबर सुनके लगा है। उनके अरबपति होने की बात सुनके हम सदमे में हूं। हम तो सोचते थे कि उ अपने को किसान कहते हैं, तो फसल उगा के अरबपति हुए होंगे, लेकिन हमको का पता कि अरबपति राजनीति की खेती करके भी हुआ जा सकता है! वैसे, राजनीति को चारा बनाकर खाने का आरोप तो अपने 'चपरासी के भइया' पर भी लगा, लेकिन जब तक उ सत्ता में हैं, हमको नहीं लगता कि सीबीआई उनका फार्म हाउस औरो बैंक खाता खोज पाएगी। अब देखिए न ताऊ भी तभिये पकड़ाए, जब हरियाणा की सत्ता हाथ से निकल गई। हम तो ई सोच के संतोष कर लेता हूं कि नेता सब पर कोयो आरोप साबित करना ओतने कठिन काम है, जेतना कि बैल दूहना। तो अब हम ई गलतफहमी पालने की स्थिति में नहीं हूं कि हमरी जेब काटके धनी हुए नेताओं की जेब कोयो असानी से काट पाएगा।

गलतफहमी तो हमको बुधिया को लेकर भी थी-- पांच साल का बच्चा पैंसठ किलोमीटर दौड़ेगा कैसे, लेकिन जब उसने दौड़ के देखा दिया, तो अब हम उसको दौड़ाने वालों को कोस रहा हूं। बताइए एक ठो अदना-सा गरीब बच्चा बिना किसी से पूछे रिकार्ड बना लिया, ई कोनो बात हुई! हद तो ई हो गई कि सरकारो से परमिशन नहीं लिया गया। हम तो खुश हूं कि सरकार ने उसको दौड़ने पर ही प्रतिबंध लगा दिया है। और बिना पूछे बनाए रिकार्ड! बिना सरकार से पूछे देश में एथलीट पैदा होने लगे, इससे बेसी गैर कानूनी बात औरो का हो सकता है? तो बुधिया जैसन लोगों की गलतफहमी को देखकर हमको लगता है कि हम बेकारे गलतफहमी के शिकार होने के लिए अपने को कोस रहे थे। यहां तो पूरी दुनिया गलतफहमी का शिकार है।

अब शेन वार्न वाला मामला ही ले लीजिए। उसकी घरवाली इस गलतफहमी में उसको छोड़कर चली गई कि दूसरी महिलाओं पर लाइन मारने वाला उसका पति उसको खुश नहीं रख पाएगा। अब एक साथ दू-दू ठो अंगरेजन सुपर मॉडल को खुश कर उनसे 'हीरो' की उपाधि पाने के बाद आप ही बताइए शेन वॉर्न को कौन बंद कमरे में जीरो मानेगा?

वैसे, गलतफहमी का एक ठो औरो उदाहरण है, लेकिन है तनि दुखद। उ परमोद जी थे न। बेचारे माया, उमा, ममता औरो जया जैसी देवियों को साध लेते थे, दुनिया भर की समस्या को मैनेज कर लेते थे, लेकिन गलतफहमी देखिए कि अपना भाई मैनेज नहीं हुआ। उ खुद इस गलतफहमी में थे कि भाई को पाला- पोसा है, उससे काहे का खतरा, तो भाई इस गलतफहमी में था कि भाई का रसूख उसको करोड़पति बना देगा।

सही बताऊं , तो गलतफहमी के इसी टक्कर में हमको झटका लग रहा है। अब नेता इस गलतफहमी में बईमानी कर-कर के तिजोरी भरता रहता है कि उसका कोयो कुछो नहीं बिगाड़ सकता, तो हम सोचता हूं कि नेता बईमानी कर के कोयो मात्र लखपति बन सकता है, करोड़पति अरबपति नहीं। ऐसे में झटका तो लगेगा ही। चलिए हमरी छोड़िए, आप तो सयाने हैं, इसलिए आप गलतफहमी मत पालिए। झटके से बचे रहिएगा।

प्रिय रंजन झा

6 Comments:

At 6:16 PM, Anonymous Anonymous said...

प्रियरंजन जी,
आपकी लेखनी का जवाब नही है। चुभते हुये व्यंग्य होते है आपके !

आशीष

 
At 6:17 PM, Blogger प्रेमलता पांडे said...

बहुत अच्छा लिखा है।बधाई।

 
At 6:41 PM, Blogger Udan Tashtari said...

प्रियरंजन जी,

बहुत बढिया और नुकिले व्यंगबाण ले कर आये हैं।
जारी रखें प्रहार।

समीर लाल

 
At 12:16 AM, Blogger ई-छाया said...

प्रियरंजन जी
बहुत अच्छा लिखा है

 
At 1:40 PM, Blogger Prashant said...

can you please tell me how can i write blogs in hindi..

please...

 
At 7:30 PM, Blogger Basera said...

भाया, ताऊ का कछु बिगड़ा है कि नहीं। सुना वो तो अमेरीका बैठा है आराम से। दो चार सौ करोड़ जब्त भी कर लिया तो क्या। कोनू फ़र्क नाहीं।

 

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