Friday, April 21, 2006

नाम 'सोनिया' विहार औरो पानी मांगिए अमर सिंह से!

अक्सर ई कहा जाता है कि नाम में का रखा है, फूल को किसी भी नाम से पुकारिए फूल फूल ही रहता है! लेकिन हमको लगता है कि ई सब गुजरे जमाने की बात हो गई, अब तो नाम में ही सब कुछ रखा है।

टीवी पर एक ठो विगयापन आता है, जिसमें हरि शब्द का स्पेलिंग कुछ ऐसन समझाया जाता है- - एच फोर हिटलर, ए फोर एरोगेंट, आर फोर रास्कल औरो आई फोर इडियट। अब आप कहिएगा, इसमें तो कुछो नहीं है, एक आदमी के नाम की स्पेलिंगे तो समझाया गया है, लेकिन ऐसन बात है नहीं। जिसको दिक्कत होना है, उसको होना है, आप कुछ नहीं कर सकते। तभिए न जॉब वेबसाइट के ई परचार को देखकर हरि नाम के एक ठो बचवा के बाप ने साइट पर केस कर दिया है औरो एक करोड़ हर्जाना मांगा है। जी हां, एक करोड़ मांगा गया है औरो आप कहते हैं कि नाम में कुछो नहीं रखा है।

अगर हम आपको ई कहें कि नाम के चक्कर में दिल्ली की जनता प्यासी मर रही है, तो आप नहीं मानिएगा, लेकिन सच यही है। का है कि दिल्ली सरकार करोड़ों टका लगाके जिस जल संयंत्र से दिल्ली की 'बड़ी प्यास' बुझाना चाह रही है, उसका नामे गलत रखा गया है-- सोनिया विहार जल संयंत्र। अब आप ही कहिए, एतना बड़का औरो वोट जुगाड़ू प्रोजेक्ट का नाम सोनिया गांधी के नाम पर रखिएगा औरो अमर सिंह व मुलायम सिंह से ई उम्मीद कीजिएगा कि उ इसको पानी सप्लाई करे, तो आप से बेसी बेवकूफ दुनिया में कौन हो सकता है? ई तो वही बात हो गई कि 'गांगुली फैंस क्लब' के उद्घाटन के लिए आप ग्रेग चैपल को बुलावा भेजें।

वैसे, दिल्ली में ऐसन बत्तीसों नाम आपको मिल जाएंगे, जो एकदमे गलत रखा गया है। डीडीए को ही लीजिए, दिल्ली डेवलपमेंट अथारिटी के बदले इसका नाम अगर दिल्ली डिस्ट्रक्टिव अथारिटी रखा जाता, तो बेसी सही रहता। काहे कि डीडीए ने दिल्ली को केतना डेवलप किया है, ई नहिए बताया जाए, तो बढ़िया रहेगा। पहले नगर निगम को लोग नरक निगम कहते थे, तो सामने वाला समझ जाता था कि मजाक किया जा रहा है, लेकिन आज एमसीडी, यानी दिल्ली नगर निगम को अगर आप दिल्ली नरक निगम कहिएगा, तो कोर्ट भी आप पर डिफेमेशन का केस चलाने की इजाजत नहीं देगा। काहे कि कोर्ट खुदे कह चुका है कि एमसीडी पर ताला लगा देना चाहिए।

वैसे, खुद सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में कम नहीं है। उसको अंग्रेजी पेपर में एससी लिखा जाता है, लेकिन हम जब पेपर में एससी देखता हूं तो हमको उसका मतलब 'सनकी कोर्ट' समझ में आता है। मतलब ऐसन कोर्ट, जो किसी मामले को पकड़कर महीनो उसी को मथता रहे औरो परिणाम तक पहुंचाने से पहिले कौनो औरो मामला में बिजी हो जाए। इसको सनकी नहीं तो औरो का कहिएगा?
इसी तरह सीपी यानी कनॉट प्लेस को कंजस्टेड प्लेस कहना बेसी बढ़िया होगा। यूं तो डीयू यानी दिल्ली यूनिवर्सिटी को डैमेज यूनिवर्सिटी कहना ही बेसी शोभता है। काहे कि दिनोंदिन उ बर्बादे हो रहा है। सीपी के बगले में बारखम्बा है। उसका नाम सुनकर हमरा एक मित्र वहां बारह ठो खम्भा तलाश रहा था, लेकिन उसे का पता कि गालिब की समाधि को मूत्रालय बना देने वाले हम धरोहर-प्रिय नागरिकों के देश में कोई धरोहर ढूंढना बुड़बकी है।

दिल्ली जल बोर्ड को डीजेबी कहा जाता है, लेकिन जिस तरह से दिल्ली वालों का गला पानी के लिए सूखता रहता है, उसे देखके तो इसे डेड जल बोर्ड, यानी मृत जल बोर्ड ज्यादा बेहतर होगा। इसी तरह राजधानी की पुलिस अपने को डीपी लिखती है। वैसे तो इसको दिल्ली पुलिस पढ़ा जाता है, लेकिन इसे डिस्ट्रक्टिव पुलिस पढ़ना बेसी सही होगा। काहे कि अपराधियों को पकड़ने की आशा आप उनसे कर नहीं सकते, लेकिन डिस्ट्रक्शन का काम देकर देखिए उ केतना तेजी से करती है। प्रदर्शनकारियों पर उनसे लाठी चलवाकर देख लीजिए, सीलिंग के लिए दुकान बंद करवाकर देख लीजिए औरो अवैध निर्माण गिरवाने में उनसे मदद लेकर देख लीजिए, काम एकदम चोखा होगा कि आप भी आश्चर्य करेंगे!
प्रिय रंजन झा

2 Comments:

At 1:54 AM, Anonymous राम चन्द्र मिश्र said...

अच्छा लगा।

 
At 9:13 AM, Blogger Vijay Wadnere said...

सही लिखे हो भाई, ये तो वही मिसाल हो गई कि:

"नाम काम के मेल का क्या है सामन्जस्य,
नाम मिला कुछ और तो शक्ल अक्ल कुछ और!!"

 

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