Friday, November 03, 2006

टू मच क्रिकेट ने किया बोर

लगता है टू मच क्रिकेट से लोग बोर हो गए हैं। इसका अंदाजा चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान सूने पड़े मैदानों से लगाया जा सकता है। पूरे साल क्रिकेट ही क्रिकेट ने वन डे का चार्म खत्म कर डाला है। कहते हैं हर चीज अपनी ही सीमा में अच्छी लगती है। क्रिकेट में पैसों की बौछार ने दुनिया की सभी टीमों को इतना व्यस्त कर डाला है कि लोग रोज-रोज वही चेहरे देखते-देखते अब ऊब गए हैं। मिनी वर्ल्ड कप मानी जाने वाली चैंपियंस ट्रॉफी में दुनिया के धुरंधर खिलाड़ियों के होने के बावजूद जो जुनून क्रिकेट के इस दीवाने देश में होना चाहिए था वह नदारद रहा। दर्शकों के मैदान पर न होने के कई कारण हैं।

जो लोग मैदान में नजर नहीं आते वे घर पर टीवी पर मैच का मजा लेते हैं। बड़े स्क्रीन के आ जाने पर अब मैदान में जाने से लोग कतराते हैं और घर पर बैठ कर ही इसका मजा लेना बेहतर समझते हैं। बड़ी वजह टीम इंडिया के घटिया प्रदर्शन की भी है। क्रिकेट फैन्स जिन खिलाड़ियों को अपने पलकों पर बैठाते थे और जिन्हें गॉड मानते थे उनके प्रति अब वह श्रद्धा खत्म हो गई है। लगातार फ्लॉप शो के बाद जिन्हें हम अपना हीरो मानते थे अब वे जीरो बन गए हैं।

चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन ऐसे समय रखा गया जब कई त्यौहार एक साथ आए जैसे दशहरा, दीपावली और ईद। मौसम के हिसाब से भी यह समय ठीक नहीं है। इस सीजन में कई बीमारियों भी होती हैं जिस कारण कई लोग मैच नहीं देख पाते। टीम इंडिया में अच्छे ऑलराउंडर्स की कमी ने भी पकवान फीका बना डाला है। पहले जैसा थ्रिल लोगों को देखने को नहीं मिल रहा। पहले कई ऐसे करामाती ऑलराउंडर्स रहते थे जो मैच को अपनी झोली में डाल लेते थे। क्रिकेट का माहौल बनाने वाली फाइटिंग स्प्रिट की कमी महसूस की जा रही है हमारी टीम में। बॉलिंग पिचों ने ताबड़तोड़ बैटिंग का मजा ही खत्म कर डाला है।

लोगों की व्यस्तता भी एक कारण है। लोग अपने-अपने कामकाज में इतने बिजी हैं कि क्रिकेट के लिए टाइम ही नहीं निकाल पाते। महंगी टिकटें भी दर्शकों को मैदान से दूर रख रही हैं। फिर मैच देखने जाओ तो कई तरह का सामना करना पड़ता है। लम्बी-लम्बी कतारों में लगना और कड़े सुरक्षा बंदोबस्त के बीच कई तरह के टेस्ट में से गुजरना पड़ता है। कई बार डंडे भी खाने पड़ते हैं।

यह पहली बार नहीं हो रहा है अभी तक हुए पहले चार आयोजन भी दर्शकों के लिहाज से फीके रहे। आईसीसी को इस और ध्यान देना होगा ताकि यह मिनी वर्ल्ड कप दर्शकों को अपनी ओर खींच सके।

2 Comments:

At 11:32 PM, Blogger भुवनेश शर्मा said...

किसने कह दिया आपसे कि लोग क्रिकेट से बोर हो गये अरे भाई जब तक हर मैच में हार नहीं देख लेते कुर्सी से हिलते नहीं।
अब जब टीम ही बाहर है तो बेचारे क्या करें।

 
At 10:02 AM, Blogger संजय बेंगाणी said...

बात तो आपने पते की है, वैसे दर्शक जुटाने के लिए जरूरी हैं की भारतीय टीम बीच बीच में जितती (या उसे जितवाते रहें)रहे.

 

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